Thursday, September 8, 2011

बम फटने से सिर्फ बारुद, छर्रे और कीलें ही नहीं निकलती..साथ में निकलती है आह और...

देश का दिल फिर छलनी हुआ है। बम फटने से सिर्फ बारुद, छर्रे और कीलें ही नहीं निकलती..साथ में निकलती है आह और आंसू। जख्मों पर सरकार लगाती है मुआवजे का मरहम। एजेंसियां जांच करती हैं लेकिन रिपोर्ट आने से पहले ही आतंकी फिर कर देते हैं एक और हमला। आखिर डरे-सहमे कब तक रहेंगे हम।





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सुशासन की त्रासदी

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