Monday, December 5, 2011

हमने धर्मनिरपेक्षता का पदक लगाए तथाकथित सिकुलारीज़म के अलमबरदारों को भी देखा,राजनीतिक शासकों को भी देखा, न्यायपालिका के न्याय को देखा और अपने मिललीरहनुमाओं के नेतृत्व को भी देखा,इन 19 सालों में हमने अपनों की सादगी भी देखी और गैरों कीअय्यारी भी अब आप नौजवानों को भी बड़ी हसरत से देख रही हूँ लेकिन क्या मैं सिर्फ देखती ही रहूंगी या फिर


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सुशासन की त्रासदी

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