Sunday, April 3, 2011

धोनी जैसा कोई नहीं: ये है कैप्टन कूल की पूरी कहानी


28 साल बाद एक बार फिर भारत को विश् कप दिलाने वाले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी इतिहास पुरुष बन गए हैं। 7 जुलाई 1981 को तत्कालीन बिहार की राजधानी रांची में जन्मे धोनी ने अपना क्रिकेट करियर 1999-2000 में शुरू किया था। पहली बार एकदिवसीय मैच खेलने का मौका उन्हें बांग्लादेश के खिलाफ  23 दिसंबर 2004 को मिला। हालांकि इस मैच में वे पहली ही गेंद पर आउट हो गए थे। इसके बाद अगले चार मैचों में उनकी बल्लेबाजी किसी को प्रभावित नहीं कर पाई थी। विशाखापट्टनम में पाकिस्तान के खिलाफ अपने पांचवे मैच में उनका जो कमाल दिखा, उससे उनके प्रति लोगों की सोच ही बदल गई। इस मैच में उन्होंने 123 गेंदो पर 148 रन बनाए। धोनी ने 15 चौके और चार छक्के लगाए और अपनी जिंदगी का पहला मैन ऑफ मैच अवार्ड जीता। धोनी ने खुद को सिर्फ एक अच्छा विकेटकीपर बल्कि अव्वल बल्लेबाज भी साबित किया है।
धोनी के नेतृत् में भारत टी20 वर्ल् कप पहले ही जीत चुका है और वह टेस् क्रिकेट में भारतीय टीम को नंबर 1 रैंकिंग भी दिला चुके हैं। वर्ल् कप में जीत के बाद टीम वनडे क्रिकेट में भी नंबर 1 हो गई है। बस आईसीसी की ओर से इसकी औपचारिक घोषणा होनी बाकी है।धोनी को बिहार के अंडर 19 टीम में 1998-99 में शामिल किया गया। तब उन्होंने 5 मैचों में 176 रन बनाए। बिहार टीम में रणजी ट्रॉफी के लिए उन्होंने 1999–2000 के सीज़न में पहली बार खेला। 2003/04 के सीज़न में रणजी मुकाबले में धोनी ने असम के खिलाफ शतक लगाया जिससे उन्हें पहचान मिली और उन्हें भारत- में जिम्बाववे और केन्या के दौरे में मौका दिया गया। इस दौरे के दौरान उनके प्रदर्शन को काफी सराहना और पहचान मिली। कई बड़े खिलाड़ियों के साथ साथ उन्होंने तत्कालीन भारतीय कप्तान सौरव गांगुली का ध्यान आकर्षित किया।

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सितंबर 2007 को वनडे टीम की कप्तानी उन्हें मिली। उस दौरान ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप का टूर्नामेंट चल रहा था। अंतत: 24 सितंबर को वह शुभ घड़ी आई जब भारत ने उनके नेतृत् में आईसीसी ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप का खिताब जीता लिया। उसके बाद भारत ने 2007-08 में कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज, कॉम्पैक कप (2009-10) और एशिया कप (2010) जीत लिया।
धोनी ने कभी भी क्रिकेट करियर में रैंकिग को महत्व नहीं दिया। उनकी नज़र में रैंक से बढ़कर टीम का प्रदर्शन और खेल जीतना है।
 
रांची में पले-बड़े धोनी के परिवार में उनकी मां देवकी देवी और पिता पान सिंह के अलावा एक बहन और एक भाई है। धोनी को म्यूज़िक सुनना बहुत पसंद है और खासतौर पर वे लता मंगेशकर और किशोर कुमार को सुनना पसंद करते हैं। बाइक्स का धोनी को खासतौर पर बेहद शौक है। उनका कहना है कि उन्हे स्पीड बहुत पसंद है। धोनी भगवान में पक्का विश्वास रखने वाले शख् हैं। इसके अलावा उन्हें कंप्यूटर गेम्स और बैडमिंटन खेलना भी पसंद है। धोनी एडम गिलक्रिस्ट के बड़े फैन हैं।
धोनी आत्मविश्वास से भरे हुए रहते हैं। मैदान पर वह आक्रामक प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं। धोनी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह सकारात्मक विचार रखते हैं और अपना आपा नहीं खोते हैं। तभी उन्हें कैप्टन कूल कहा जाता है। धोनी में सही फैसले लेने की गजब की क्षमता है। इसके अलावा वह अपनी गलतियों की जिम्मेदारी भी बखूबी लेना जानते हैं।
धोनी यूथ आइकन हैं। उनके लंबे बाल कभी युवाओं के बीच चर्चा का विषय थे। पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ भी उनकी उस हेयरस्टाइल के कायल हो गए थे। प्यार से लोग उन्हे माही बुलाते हैं। धोनी मैदान पर जितने आक्रामक दिखते हैं, निजी जिंदगी में वैसे बिलकुल नहीं है। उनके मुताबिक वे निजी जिंदगी में बड़े लापरवाह हैं और उन्हें बातें करना बिलकुल पसंद नहीं हैं। वे ज़्यादातर चुप रहना पसंद करते हैं। वे काफी मस्तमौला और मजाकिया किस्म के इंसान हैं।
 
कप्तान के तौर पर धोनी की खूबियां 
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खिलाडिय़ों में टीम भावना को बढ़ाने का काम किया।
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परिस्थिति के मद्देनजर सही खिलाडिय़ों को सही मौके पर आजमाया।
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वरिष्ठ खिलाडिय़ों से सलाह-मशविरा करने में पीछे नहीं हटे।
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मानसिक आवेग पर अंकुश रखा और चेहरे पर विश्वास को कायम रखा।
लकी कप्तान : एम एस धोनी
मैदानी रणनीति में माहिर हैं तथा कुशल कप्तानी से खिलाडिय़ों को सौ प्रतिशत देने के लिए प्रेरित किया। खिलाडिय़ों को बदलने मैदानी निर्णय लेने के मामले में किसी दबाव में नहीं आए। सभी खिलाडिय़ों को खेलने का मौका दिया। वे दूसरों को प्रेरित करते रहे। सेमीफाइनल तक उनका बल्ला खामोश ही रहा। लेकिन फाइनल में विजयी पारी खेली।

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