पांचवें चरण के चुनाव के बाद अब चर्चा गर्म है कि आखिर चुनाव बाद यूपी में क्या होगा। श्रीप्रकाश जायसवाल के बयान ने आग में घी का काम किया कि कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला तो राष्ट्रपति शासन लगेगा। वोट रिकॉर्डतोड़ पड़ रहे हैं मगर हवा किस ओर बह रही है इसका अंदाजा किसी को नहीं। जैसे हालात हैं उससे इतना तो साफ है कि स्पष्ट बहुमत किसी को नहीं मिल रहा। जानकार मानते हैं कि एसपी सबसे बड़ी पार्टी हो सकती है। ऐसे में सवाल ये है कि यूपी में 6 मार्च के बाद क्या होगा?श्रीप्रकाश जायसवाल ने राष्ट्रपति शासन वाला बयान गलतफहमी में दिया या फिर उनसे अनजाने में कोई खुलासा हो गया? ये सवाल इसलिए भी पूछा जा रहा है क्योंकि कांग्रेस ने पहली बार अपने किसी मंत्री को उसकी बयानबाजी पर कड़ी फटकार लगाई। अब तक बेनी प्रसाद वर्मा और सलमान खुर्शीद का बचाव करती रही पार्टी ने जायसवाल को सोच-समझ कर बोलने की सलाह दी।दरअसल यूपी की सियासत के जानकार मानते हैं कि कांग्रेस के लिए इन विधानसभा चुनावों से ज्यादा 2014 के लोकसभा चुनाव अहम हैं। अपनी जमीनी हकीकत से वो अच्छी तरह वाकिफ है। अपने बूते सरकार बननी नहीं और पार्टी किसी और को समर्थन का रिस्क उठाना नहीं चाहती। केंद्र में ममता दीदी की दादागीरी बर्दाश्त की जा सकती है, मगर यूपी में माया और मुलायम का साथ मुश्किलें पैदा करेगा।लिहाजा पार्टी में एक राय ये है कि अगर मुलायम 150 से 155 सीटें ही हासिल कर पाते हैं तो पार्टी खुद को उनसे दूर रखे। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगे और अपने चहेते अफसरों के जरिए केंद्र सरकार यूपी में कांग्रेस की छवि सुधारे। इसका लाभ पार्टी 2014 के लोकसभा चुनाव में उठा सकती है।कयास तमाम तरह के लगाए जा रहे हैं लेकिन इस पर ज्यादातर की राय एक है कि सबसे बड़ी पार्टी समाजवादी ही होगी। ऐसे में ये दावा करने वाले भी कम नहीं हैं कि अगर मुलायम 170 सीटें जुटा लेते हैं तो फिर कुछ छोटे खिलाड़ियों और निर्दलीयों की मदद से सरकार बना लेंगे।लेकिन सवाल है कि अगर बीएसपी गिरते-पड़ते भी 140 सीटें कमा लेती है तो क्या होगा। ऐसे में अगर बीजेपी के पास 60 से 65 सीटें रहीं तो क्या होगा। क्या दोनों पार्टियां फिर हाथ मिला सकती हैं। बीजेपी के पिछले अनुभव तो खराब रहे हैं।सूबे को राष्ट्रपति शासन से रोकने के लिए बीजेपी एक बार फिर ये रिस्क ले सकती है। विकल्प और भी हैं कुछ जानकार ये कयास भी लगा रहे हैं कि कम सीटों के बाद भी कांग्रेस मुख्यमंत्री अपना बनाए और समाजवादी पार्टी सरकार में दूसरे नंबर की खिलाड़ी हो। बदले में केंद्र की सरकार में मुलायम सिंह यादव या अखिलेश को कुर्सी दी जाए।एक हवा-हवाई सोच ये भी है कि सरकार न बनने से नाराज मुलायम केंद्र से समर्थन वापस लेते हैं, ममता बनर्जी की धमकियां जारी रहती हैं तो कांग्रेस बड़ा दांव खेल सकती है। दोबारा आम चुनाव होंगे और कांग्रेस गठबंधन की मजबूरियों का रोना रोएगी। सारा ठीकरा सहयोगियों के सिर फोड़ अपने लिए पर्याप्त बहुमत मांगेगी। लेकिन अभी ये दूर की कौड़ी है।(साभार आई बी एन ७)
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