Wednesday, February 15, 2012

‘हो मुबारक जन्नत जाहिदों को, मैं तो बस आपका सामना चाहता हू सर-ए-बज्म कह दी दिल की बात मैंने बड़ा बेअदब हूं सजा चाहता हूं तेरे इश्क की इंतिहा चाहता हूं मेरी सादगी देख क्या चाहता हूं’।


 महान उर्दू शायर इकबाल का यह शेर वेलेनटाइन डे के दिन मंगलवार को हकीकत में बदला।तमाम चेतावनियों, रुकावटों, बहिष्कारों और बंदिशों की परवाह किए बगैर शहर के लोगों ने अपने चाहने वालों, दोस्तों और परिवार के साथ प्रेम के इस दिन को यादगार बनाया। शहर में सुबह से ही चहलपहल रही और लोगों ने एक दूसरे को बधाईयां दी। शाम को शहर के अधिकांश बाजारों में लोग परिवार समेत निकले हुए थे।वेलेनटाइन डे के मौके पर एक-दूसरे को बधाई देने का सिलसिला सोमवार रात से ही शुरू हो गया था। मंगलवार सुबह से ही लोगों पर इस दिन का जादू छाना शुरू हो गया था। आम तौर पर सुबह नौ बजे के बाद खुलने वाली गिफ्ट गैलरियां सुबह आठ बजे से ही खुल गई थीं। वेलेनटाइन वीक के अंतिम दिन को किस प्रकार से यादगार बनाया जाए, इसके लिए युवाओं ने सोमवार शाम को ही अंतिम रूप दे दिया था। शहर के विभिन्न रेस्तराओं, सिनेमा घरों और पार्कों पर युवाओं ने इस दिन का मजा उठाया। ऐसे युवाओं की भी कमी नहीं थी, जिन्होंने दोपहर या रात का खाना एक साथ खाया या लांग ड्राइव का मजा लिया।वेलेनटाइन डे का खुमार इस कदर हावी था कि शहर की कई गिफ्ट गैलरियां रात के बारह बजे तक खुली रहीं। लोगों ने देर रात को भी खरीददारी की और अपने चाहने वालों के लिए फूल खरीदे। केवल यही नहीं, गैलरी वालों ने पहले से ही गुलाब के कई प्रकार गुलदस्ते बना कर तैयार रखे थे ताकि खरीदने वालों को किसी प्रकार की समस्या न हो।जम्मू। वेलेनटाइन डे अब त्योहार बन गया है। जिस प्रकार से वेलेनटाइन डे के दिन शहरवासी घरों से बाहर निकले, उसने यह साबित कर दिया। गिफ्ट गैलरियों से लेकर फूलों की दुकानों तक लोगों का सुबह से ही तांता लगा हुआ था। एक मोटे अनुमान के अनुसार केवल शहर में ही इस दिन छह लाख रुपये के फूलों का कारोबार हुआ। इस दिन को मनाने के लिए युवाओं ने विशेष रूप से अपने दोस्तों के साथ लंच किया। गांधी नगर स्थित प्रसिद्ध दुकान पर एक साथ लंच कर रहे बलराम, अन्नु, विकास, अविनाश, तौसीफ आदि का कहना था कि वह एक साथ काम करते हैं और इस दिन एक साथ लंच करने की योजना उन्होंने सोमवार को ही बना ली थी। दोपहर को ब्रेक के समय वह सीधा लंच करने पहुंचे हैं। इस दिन का विरोध करने वाले लोगों के बारे में उक्त युवाओं का कहना था कि अगर कोई समाज को गलत संदेश दे रहा हो या अश्लीलता कर रहा हो तो उसका विरोध जायज है लेकिन आज के युग में हर कोई इतना समझदार है कि वह क्या कर रहा है जानता है। सभी को अपने तरीके से जीने की आजादी है।वेलेनटाइन डे ने एक बार फिर दिखा दिया कि आज भी गुलाब प्रेम जताने के लिए पहले पायदन पर है। शहर की विभिन्न दुकानों पर गुलाब की अलग-अलग कीमत थी। आम तौर पर दस से पंद्रह रुपये में बिकने वाली गुलाब की एक बड तीस से चालीस रुपये से बिकना शुरू हो गई। हालांकि इस दिन पीले गुलाब की मांग भी काफी रही।

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