Thursday, February 16, 2012

सियासत ने बनाया आजमगढ़ को 'आतंक की नर्सरी'

 उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले का नाम सुनते ही पूरे हिंदुस्तान की आवाम के सामने जो एक तस्वीर उभरती है, वह है आतंकवाद की खान की। जबकि सही मायने में ऐसा नहीं है। लेकिन पिछले कुछ बरसों में जिस प्रकार से दुनिया के नक्शे में आतंकवाद उभरा है और आतंकवादियों की गिरफ्तारी हुई है, उसमें से कुछ का कनेक्शन आजमगढ़ से भी है। बस यह आजमगढ़ को बदनाम करने के लिए काफी है। कैफी आजमी, राहुल सांकृत्यायन और मौलाना शिबली जैसी महान हस्तियों की कर्मस्थली आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले सैकड़ों लोगों की जन्मस्थली आजमगढ़ आतंकवाद की नर्सरी के रूप में बदनाम हो चुकी है।कैफी आजमी की बेटी और फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी बड़ी तकलीफ के साथ कहती हैं कि जब भी कोई आजमगढ़ को आतंकवाद की नर्सरी कहता है तो उन्हें बड़ा कोफ्त होता है। शबाना के शब्दों में कहें तो मैंने भले ही आजमगढ़ में जन्म नहीं लिया है, लेकिन पुरखों की जड़ें वहीं हैं। इसलिए मैं खुद को आजमगढ़ की बेटी मानती हूं।वर्ष 2008 में दिल्ली के बाटला इलाके में पुलिस की कथित मुठभेड़ में कई युवक भी मारे गए थे। इसमें से कुछ युवक आजमगढ़ के थे। बस इसके बाद से ही आजमगढ़ आतंकवाद की नर्सरी के नाम से बदनाम हो गया।आजमगढ़ के स्थानीय नागरिक भी अपने जिले को आतंकवाद की नर्सरी कहे जाने पर नाराज हैं। आजमगढ़ के स्थानीय व्यापारी विजय शर्मा कहते हैं कि हमारे शहर को जिस तरह से मीडिया ने बदनाम किया है, वह सरासर गलत है। किस जिले में गुंडे, बदमाश नहीं होते हैं। लेकिन मीडिया सिर्फ और सिर्फ आजमगढ़ को ही बदनाम करता है। साथ में हमारे नेताओं ने भी वोट बैंक की राजनीति के कारण आजमगढ़ को बदनाम कर दिया। विजय की बात में कुछ दम तब नजर आता है, जब दिल्ली में बैठे नेता अल्पसंख्यक समुदाय के वोट बैंक को पाने के लिए आजमगढ़ का नाम उछालते हैं।हिंदुस्तान की जेल में सड़ रहा डॉन अबू सलेम इसी जिले से आता है। आजमगढ़ जिला मुख्यालय से तीस किलोमीटर दूर सरायमीर में ही आजमी का जन्म हुआ था। इसके अलावा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और हाजी मस्तान मिर्जा का भी इस शहर से पुराना नाता है। इन दोनों की ससुराल आजमगढ़ ही है। जातिगत समीकरण की बात करें तो यहां मुस्लिम और यादवों की तादाद सबसे अधिक है। यहां के सैकड़ों युवा सुरक्षाबलों और भारतीय सेना में हैं।(साभार दैनिक भास्कर )

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