न्यूयॉर्क। भारतीय महिलाओं ने देश ही नहीं विदेशों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। ऐसी ही भारतीय मूल की 38 वर्षीय भैरवी ने अमेरिका के टैक्सी चालकों का दुखदर्द समझा एवं उनकी आवाज बुलंद करने में जुट गई। टैक्सी चालकों के हितों की रक्षा के लिए उनकी मांगों को लेकर कई बार भैरवी ने हड़ताल भी कराई। इन दिनों वह अमेरिकी नेशनल टैक्सी वर्कर्स अलायंस की अध्यक्ष हैं।पांच फुट लंबी दुबली-पतली यह महिला हमेशा परंपरागत भारतीय पोशाक में नजर आती है। गुजरात के सूरत शहर के निकट एक गांव में जन्मी भैरवी देसाई जब छह वर्ष की थीं, अपने परिवार के साथ अमेरिका आकर बस गई थीं। उन्होंने पढ़ाई पूरी करने के बाद करीब 16 वर्ष पूर्व सामाजिक कार्यकर्ता की हैसियत से यहां के टैक्सी चालकों की मदद करना शुरू कर दिया था। भैरवी का कहना है कि जब उन्होंने टैक्सी चालकों की परेशानियां देखीं तो तय कर लिया था कि वह उनकी मदद अवश्य करेंगी क्योंकि यह धंधा ही ऐसा है जिसमें टैक्सी चालकों का शोषण होता है। उनका कहना है कि 1979 में अमेरिका आने के बाद न्यू जर्सी के हैरिसन शहर में उनके परिवार ने बेहद गरीबी में दिन गुजारे।भैरवी बताती हैं कि मेरी मां न्यू जर्सी की एक फैक्ट्री में काम करती थीं और पिता छोटी सी परचून की दुकान चलाते थे, लेकिन माता पिता ने उन्हें हमेशा न्याय के लिए आवाज उठाना सिखाया। बचपन में दादा-दादी से भारत की आजादी की कहानियां सुनने के बाद से ही अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का जज्बा जागा।न्यूयॉर्क में करीब 50 हजार टैक्सियां चलती हैं एवं करीब 10 लाख लोग प्रतिदिन टैक्सियों का प्रयोग करते हैं इसलिए यहां की अर्थव्यवस्था में टैक्सी चालकों का बड़ा योगदान है। इन टैक्सी चालकों में अधिकतर अप्रवासी हैं। इनमें अधिकतर अशिक्षित हैं इसलिए दूसरा काम ढूंढ़ने में भी काफी मुश्किल होती है।भैरवी की संस्था न्यूयॉर्क टैक्सी अलायंस से करीब 15 हजार टैक्सी चालक जुड़े हैं। इनका कई स्तर पर शोषण किया जाता है। पुलिस भी इन्हें निशाना बनाने से नहीं चूकती है। इन्हीं मुश्किलों को लेकर भैरवी ने 1998 में हड़ताल का एलान कर शहर में टैक्सियों का संचालन बंद करा दिया था। इसके बाद भैरवी खबरों में छा गई। उन्हें टैक्सी चालकों की मांगों के लिए आवाज उठाने पर कई संस्थाओं की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका है।
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