भोपाल। भारत का दिल कहे जाने वाला राज्य मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल को झीलों की नगरी कही जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि इस खूबसूरत शहर के निर्माता दोस्त मोहम्मद खान हैं? भास्कर नॉलेज पैकेज के अंतर्गत आज हम आपको इससे जुड़ी रोचक कहानी बताने जा रहे हैं।सन् 1720 ई. के आस-पास की बात है। इतिहास में मौजूद साक्ष्यों के अनुसार निजाम शाह उस समय भोपाल के आस-पास के इलाकों के प्रतापी गौंड राजा थे। उनकी पत्नी रानी कमलापति काफी सुंदर स्त्री थीं। कई गौंड शासक उनकी सुंदरता के कायल थे। उन्हीं में से एक आलम शाह नामक शासक उनसे काफी प्रभावित थे।इसी दरम्यान रानी कमलापति के पति निजाम शाह की मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु होते ही शासकों ने उनपर गंदी निगाहें डालना शुरू कर दीं। तब रानी की सुरक्षा खतरे में पड़ गई। वे खुद को असुरक्षित महसूस करने लगीं। इसके लिए उन्होंने इस्लामनगर के दुर्दात अफगान लड़ाके दोस्त मोहम्मद खां को अपनी रक्षा का बुलावा भेजा। लेकिन रानी के पास उस समय मोहम्मद खां को देने के लिए बहुत कुछ नहीं था।इसके बावजूद उन्होंने एक लाख रुपए में सौदा तय किया। मोहम्मद खां को सौदा मंजूर हो गया और उन्होंने रानी की सुरक्षा करते हुए गौड़ राजाओं की निर्ममता से हत्या कर दी। इसके बाद रानी कमलापति मोहम्मद खां को सिर्फ 50 हजार रुपए ही दे सकीं। सौदा पूरा नहीं हुआ। ऐसे में शेष 50 हजार रुपयों के बदले रानी ने मोहम्मद खां को बेरसिया और गिन्नौर के बीच बड़ी झील के किनारे की बस्ती दे दी।मोहम्मद खां ने उसे सहर्ष स्वीकार लिया। दरअसल, वही बस्ती भोपाल के रूप में प्रसिद्ध हुई। इतिहास के पन्नों में भोपाल के जन्मदाता के रूप में राजा भोज का नाम भी चर्चे का विषय है। ऐसा कहा जाता है कि भोपाल के जन्मदाता राजा भोज ही हैं। लेकिन इतिहास में इस बात का कहीं भी विस्तार से जिक्र नहीं मिलता।इसका जिक्र शहरयार खां की किताब द बेगम्स ऑफ भोपाल में भी मिलता है।
Saturday, April 14, 2012
पति की मौत के बाद जब दूसरे शासकों ने डाली गंदी निगाहें...
भोपाल। भारत का दिल कहे जाने वाला राज्य मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल को झीलों की नगरी कही जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि इस खूबसूरत शहर के निर्माता दोस्त मोहम्मद खान हैं? भास्कर नॉलेज पैकेज के अंतर्गत आज हम आपको इससे जुड़ी रोचक कहानी बताने जा रहे हैं।सन् 1720 ई. के आस-पास की बात है। इतिहास में मौजूद साक्ष्यों के अनुसार निजाम शाह उस समय भोपाल के आस-पास के इलाकों के प्रतापी गौंड राजा थे। उनकी पत्नी रानी कमलापति काफी सुंदर स्त्री थीं। कई गौंड शासक उनकी सुंदरता के कायल थे। उन्हीं में से एक आलम शाह नामक शासक उनसे काफी प्रभावित थे।इसी दरम्यान रानी कमलापति के पति निजाम शाह की मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु होते ही शासकों ने उनपर गंदी निगाहें डालना शुरू कर दीं। तब रानी की सुरक्षा खतरे में पड़ गई। वे खुद को असुरक्षित महसूस करने लगीं। इसके लिए उन्होंने इस्लामनगर के दुर्दात अफगान लड़ाके दोस्त मोहम्मद खां को अपनी रक्षा का बुलावा भेजा। लेकिन रानी के पास उस समय मोहम्मद खां को देने के लिए बहुत कुछ नहीं था।इसके बावजूद उन्होंने एक लाख रुपए में सौदा तय किया। मोहम्मद खां को सौदा मंजूर हो गया और उन्होंने रानी की सुरक्षा करते हुए गौड़ राजाओं की निर्ममता से हत्या कर दी। इसके बाद रानी कमलापति मोहम्मद खां को सिर्फ 50 हजार रुपए ही दे सकीं। सौदा पूरा नहीं हुआ। ऐसे में शेष 50 हजार रुपयों के बदले रानी ने मोहम्मद खां को बेरसिया और गिन्नौर के बीच बड़ी झील के किनारे की बस्ती दे दी।मोहम्मद खां ने उसे सहर्ष स्वीकार लिया। दरअसल, वही बस्ती भोपाल के रूप में प्रसिद्ध हुई। इतिहास के पन्नों में भोपाल के जन्मदाता के रूप में राजा भोज का नाम भी चर्चे का विषय है। ऐसा कहा जाता है कि भोपाल के जन्मदाता राजा भोज ही हैं। लेकिन इतिहास में इस बात का कहीं भी विस्तार से जिक्र नहीं मिलता।इसका जिक्र शहरयार खां की किताब द बेगम्स ऑफ भोपाल में भी मिलता है।
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