राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के गोल रिम वाला चश्मा, चरखा और 1948 में जिस जगह बापू की हत्या की गई थी, वहां की थोड़ी सी मिट्टी और घास उन दुर्लभ चीजों में हैं, जिन्हें 17 अप्रैल को नीलाम किया जाएगा। ‘मुलॉक्स’ नीलामी घर इन्हें नीलाम कर रहा है। इस नीलामी में बापू की ओर से लिखे गए कुछ पत्र भी शामिल हैं।गौर हो कि बापू के चश्मे, चरखा और नई दिल्ली के बिड़ला हाउस की थोड़ी सी मिट्टी और घास की नीलामी के लिए ‘मुलॉक्स’ की ओर से शुरुआती कीमत 10,000 पाउंड से 15,000 पाउंड तय की गई है। बिड़ला हाउस की थोड़ी सी मिट्टी और घास तो पीपी नांबियार नाम के एक शख्स ने उस दिन सहेज कर रखा था जिस दिन गांधीजी की हत्या हुई थी। इस बारे में नांबियार ने एक स्तंभ भी लिखा था। महात्मा गांधी के जिस चश्मे की नीलामी की जानी है उसे 1890 में उस वक्त लंदन में खरीदा गया था जब वह कानून की पढ़ाई करने आए थे।साल 1931 में बापू जब लंदन आए थे तो उस वक्त ली गई उनकी असल तस्वीरें भी नीलाम की जाएंगी। रंगून में एनईआर के सार्जेंट रहे राघवन को बापू की ओर से लिखे गए पत्रों की भी नीलामी होगी। गुजराती में गांधीजी की ओर से लिखे गए पत्र भी नीलाम होंगे। उधर, लंदन में बापू की वस्तुओं की नीलामी को रोकने के लिए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की गई है। अगर नीलामी न रुक पाये तो भारत सरकार नीलामी में इन वस्तुओं की खरीददारी कर ले और इस खरीददारी में जो भी रकम लगेगी वह मानस संगम संस्था आम जनता से जनसहयोग और चंदे के रूप में एकत्र करके भारत सरकार को दे देगी। बस हर भारतीय की तरह उनकी भी यह इच्छा है कि राष्ट्रपिता के खून से सनी मिट्टी और अन्य सामान भारत लाया जा सके।उधर, गांधीवादी लेखक गिरिराज किशोर ने बताया कि उन्होंने महात्मा गांधी की वस्तुओं की नीलामी रोकने के लिये मशहूर समाज सेवी अन्ना हजारे को फोन किया और उन्हें पूरी बात बताई और उनसे इस नीलामी को रोकने के लिये कुछ करने को कहा। गौरतलब है कि लेखक गिरिराज किशोर ने लंदन में महात्मा गांधी के खून से सनी मिट्टी एवं अन्य वस्तुओं की नीलामी को रोकने और ऐसा न होने पर पद्मश्री सम्मान वापस करने की बाबत पहले पांच अप्रैल को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था, लेकिन प्रधान मंत्री को लिखे पत्र का कोई जवाब न आया तो उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर उनसे बापू के इन सामानों की नीलामी रोकने के लिये हस्तक्षेप की मांग की थी।उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कहा था कि अगर लंदन में 17 अप्रैल को गांधी के सामान की नीलामी हो गई तो वह बहुत दुखी होंगे इसलिए वह चाहते है कि राष्ट्रपति 18 अप्रैल के बाद का कोई समय उन्हें दे दे ताकि वह अपना पदमश्री सम्मान उन्हें वापस कर सकें। लंदन में महात्मा गांधी के खून से सनी मिटटी एवं अन्य वस्तुओं की नीलामी से दुखी प्रख्यात गांधी वादी लेखक पदमश्री गिरिराज किशोर ने गांधी की इन वस्तुओं की नीलामी को रोकने के लिये इसी माह पांच अप्रैल को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक पत्र भी लिखा था लेकिन आज तक उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय से पत्र का कोई जवाब नही मिला है।पद्मश्री किशोर ने कहा कि जब प्रधानमंत्री को लिखे पत्र का कोई जवाब नहीं मिला था तो हमने मजबूर होकर राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को पत्र लिखा था कि सरकार इस नीलामी को रोकने के लिये कुछ प्रयास करें। मानस संगम नामक संस्था ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कहा कि भारत सरकार इस सामान को नीलामी में खरीद लें और उसको खरीदने में जो पैसा सरकार का लगेगा वह जनता से चंदा करके उनकी संस्था सरकार को उपलब्ध करा देगी।
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