Friday, March 2, 2012

चुन लो अपनी किताब


यहां सजी हुई हैं किताबें ही किताबें। बड़ों की किताबें, बच्चों की किताबें, दिल को छूने वाली किताबें, रोमांच से भरपूर किताबें..। पर ये हैं सीडी में सिमटी हुई और ई-बुक में बंद। विश्व पुस्तक मेले से आपके लिए हम लाए हैं नए जमाने की नई किताबें..गूगल बाबा की जय! एक यही 'बाबा' हैं, जो हमें बस एक क्लिक पर दुनिया की किसी भी किताब से रू-ब-रू करा देते हैं। पर हमें चाहिए ऐसी किताब, जिसके पन्ने पलट सकें, जिनकी बातों को सहेज कर जेहन में रख सकें। क्योंकि शोध बताते हैं कि भले ही गूगल बाबा की शरण में जाने से ज्ञान मिलता हो, लेकिन जो इनकी अंधी भक्ति करते हैं, उनकी स्मृति कमजोर होने लगती है..।दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे 20वें विश्व पुस्तक मेले में लगभग सभी प्रकाशकों से ऐसी ही बातें सुनने को मिलीं। जब हमने उनसे पूछा कि गूगल से मुकाबला कैसे होगा? तो उन्होंने हमें दिखाईं बुक्स और सीडी में बंद अनगिनत किताबें। मैकमिलन प्रकाशन के स्टाल में मिले विक्रम ने बताया, 'ये हैं नए जमाने की नई किताबें, जिनसे यंग रीडर्स को आसानी से जोड़ा जा सकता है।'

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