Saturday, August 13, 2011

आधी रात को आई छुप कर दुल्हन आजादी की !

आधी रात को आई छुप कर
दुल्हन आजादी की !
हमने किया बेपर्दा उसको
सुबह - शाम चोराहे पर !
दुनिया को दिया हमने
सन्देश अहिंषा का  !
फिर भी.........
हर तरफ मचा है हाहाकार ,
क्यों रुसवा होते है हर बार नेता हमारे ,
दुनिया की इस भीड़ में !
क्यों रुसवा होते है हर बार खिलाडी हमारे ,
हर ओलंपिक और वर्ल्ड कप में !
क्यों रुसवा होती है भारतीय नारी ,
हर गली -चोराहे पर !
कभी जाति के नाम पर !
तो कभी प्यार के नाम पर !
देवी कहलाने के बाद भी !
आधी रात को आई छुप कर
दुल्हन आजादी की !
इक बार सोचो क्या सच में हमने ,
संभाला है अपनी आजादी को !
अपने दिल से पुछो कैसे  ,
हम खुद ही करते है ,
शर्मशार अपनी आजादी की दुल्हन को ,
हर गली - चोराहे पर !
भूल जाते है अपनी माँ को ,
जो देती है जीवन हम को ,
इसलिए हम सभी भारतीयों को ,
अपनी आजादी की कदर करनी चाहिए !
जिसको हमने बहुत कुर्बानियों से पाया है  !
पंद्रह अगस्त  पर मेरी और से
मेरे भारत महान के महान भारतीयों को
हार्दिक शुभकामनाये  !

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