उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव""दिल को बहलाने के लिए गालिब ये ख्याल अच्छा है""मेराज एम नूरी
उत्तर प्रदेश के नगर निकाय चूनाव में जिस तरह से मात्र मेयर की जीत पर भाजपा की लहर का दावा किया जा रहा है वो ना सिर्फ भाजपा और राष्ट्रवादी मीडिया की गलत बयानी है बल्कि गुमराह करने और हकीकत से मुंह छुपाने की भी एक कोशिश है।मेयर के 16 पदों में से भाजपा के खाते में 14 गई है।बाक़ी दो सीटों पर बहुजन समाज पार्टी ने अपना क़ब्जा किया।ये भी हकीकत है कि मेयर चुनाव के लिए ई वी एम का प्रयोग किया गया है जो पिछले यूपी चुनाव से शक के घेरे में है जबकि दूसरे पदों के लिए बैलेट पेपर का प्रयोग किया गया।असल चुनाव तो बैलेट से हुए है जिसका नतीजा चौंकाने वाला ही नहीं बल्कि भाजपा की 8 महीने की सरकार को पूरी तरह से नकारने जैसा है ।आंकड़े बताते हैं कि भाजपा यूपी में 8 महीने में ही पूरी तरह फेल जो गई है और लोगों ने उसे खुद से दूर कर दिया है ।ये अलग बात है कि भक्ति में तल्लीन और खौफ से मजबूर राष्ट्रवादी मीडिया आंकड़ों को नहीं अकड़ को अपने यहां जगह देने पर मजबूर है ।अगर ऐसा नहीं होता तो सिर्फ मेयर की जीत को हेडलाइन बनाकर पेश नहीं किया जाता।पेश करने के लिए बहुत कुछ था लेकिन मैंने कहा ना कि मजबूर मीडिया वो पेश ना कर सका जो सत्य था बल्कि उसने वहीं पेश किया जिसका हुक्म हुआ और जो योगी की पीठ थपथपाने और गुजरात में राजनीतिक फ़ायदा हासिल करने के लिए बेहतर था ।
आंकड़ा ये है कि यूपी की कुल नगर पालिका अध्यक्ष पदों में सेभाजपा 69 पर तो गैर भाजपा दल 126 पर कामयाब हुए।कुल नगर पंचायत अध्यक्ष पदों पर भाजपा 100 सीटों तो गैर भाजपा दल 338 सीटों पर कामयाब हुए।कुल नगर पार्षद पदों पर भाजपा 596 पर तो गैर भाजपा दल 701 सीटों पर अपना परचम लहराने में कामयाब रहे ।कुल नगर पालिका सदस्य पदों में से भाजपा 916 पर तो गैर भाजपा दल ने 4295 पदों पर जीत दर्ज की।कुल नगर पंचायत सदस्य पदों में से भाजपा 663 पर तो गैर भाजपा दल 4715 पर कामयाब रहे।चुनाव आयोग के आंकड़ो के मुताबिक कुल 12647 सीटों पर मतदान हुए. जिसमें कुल 7510 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की. जबकि बीजेपी की बात करें तो बीजेपी ने 2366 सीटों पर जीत हासिल की. वही समाजवादी पार्टी ने 1260 सीटो पर जीत हासिल की तो बहुजन समाज पार्टी ने 703 सीटों पर.इसी प्रकार 420 सीटों पर कांग्रेस और पहली बार उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी ने 41 सीटों पर विजय हासिल की. इसी प्रकार अन्य क्षेत्रीय दलों की बात करें तो RLD ने 49, AIMIM ने 26, AIFB 15, CPI 7, RJD 6, Shiv Sena 4, NCP 1, CPI(M) 1 सीट पर जीत हासिल की है.
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पिछली बार जब सपा की सरकार थी और भाजपा को कोई नामलेवा नहीं था, तब भी तो निकायों में भाजपा की ही सरकार थी, मगर साल भर भी नहीं हुए बहुमत से सत्ता में और पिछली बार के प्रदर्शन के आंकड़े तक ही पार्टी हाफ गई. भाजपा भले इस जीत पर खूब इतरा ले, मगर हकीकत है कि शहरियों की तुलना में ग्रामीण इलाके में नाराजगी झेलनी पड़ी है.
ऐसे में आंकड़ों से खेल कर और महज मेयर के चुनाव को केंद्र में रख कर खुद की पीठ थपथपाने वाली भाजपा और उनका पिछलग्गू बन कर उसकी हाँ में हां मिलाकर अपना उल्लू सीधा करने वाली तथाकथित मीडिया जो खुश हो रही है दरअसल वो जीत की खुशी नहीं बल्कि " दिल को बहलाने के लिए गालिब ये ख्याल अच्छा है "के जैसी है ।हकीकत तो तो ये है कि 8 महीने में ही योगी सरकार की लोगों ने हवा निकाल दी है ।चूंकि गुजरात में भी हवा खराब है इसलिए भाजपा और राष्ट्रवादी मीडिया इस एक जीत से काम चलाकर गुजरात में हव्वा खड़ा करने की फिराक में है जो शायद होता हुआ नहीं दिख रहा है।
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